short hindi story|कोई फर्क नही पड़ता| short hindi Inspiring story

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कोई फर्क नही पड़ता-


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दुनियां में कई तरह के लोग होते हैं जिनमें से कुछ लोग ऐसे होते हैं,जिन्हें अगर प्यार में धोखा मिल जाये या किसी वजह से उनका प्यार अधूरा रह जाये तो वो लोग प्यार के बारे में नकारात्मक सोच रखने लगते हैं और अपनी जिंदगी बर्बाद कर लेते हैं।लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें प्यार में धोखा मिलने के बाद वो लोग उसे भूलकर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाते हैं।
ये कहानी एक लड़के के बारे में है जो अपने जीवन में सफल होने के लिये दुनिया की न सुन कर अपने आप को एक सफल व्यक्ति बनाने के लिये अपनी पूरी कोशिश करता है,तो चलिए बढ़ते हैं कहानी की ओर-
        अभिनव बचपन से ही बाकी सभी से कुछ अलग करना चाहता था।डॉक्टर, इंजीनियर तो लाखों लोग बनना चाहते हैं लेकिन और उन लाखों लोगों में से कुछ गिनती के लोग ही डॉक्टर, इंजीनियर बन पाते हैं और अभिनव उन लाखों लोगों की भीड़ में नही फसना चाहता था।अभिनव को हमेशा कुछ creative करना पसंद था इसलिए वो नई-नई paintings बनाते रहता था।लेकिन अभिनव अच्छी तस्वीरें नहीं बना पाता था और जब वो अपनी बनाई हुई तस्वीरें क्लास में दिखता था तो सारी क्लास उस पर हँसती थी लेकिन जब उससे कोई पूछता था कि,"ये सारी क्लास तुम्हारी बनाई हुई तस्वीरों पर हँसती है तो क्या तुम्हें बुरा नही लगता?"तब अभिनव सिर्फ यही जवाब देता था कि,"कोई फर्क नही पड़ता" और हँसते हुये वहाँ से चला जाता।अभिनव रात-रात भर जागकर तस्वीरें बनाता था और दिन व दिन उसकी चित्रकारी  अच्छी होती जा रही थी। देखते-देखते अभिनव अच्छी चित्रकारी सीख गया।अब क्लास में कोई भी अभिनव की तरह चित्रकारी नही कर पाता था।उसने चित्रकला में अपना career बनाने का ठान लिया।स्कूल पूरा होने के बाद उसने एक अच्छे कॉलेज में दाखिला ले लिया।
एक बार कॉलेज में painting competition हुआ औऱ उसमे अभिनव ने भी हिस्सा लिया।सभी प्रतियोगियों की paintings को देखने जिला अध्यक्ष आये, सभी प्रतियोगियों की एक से बढ़कर एक paintings बनाईं थी लेकिन जिला अध्यक्ष अभिनव की painting को देख कर हैरान थे क्योंकि सभी ने normal paintings बनाईं थीं लेकिन अभिनव ने जिला अध्यक्ष की ही तसवीर बनाई थी।ये देखकर जिला अध्यक्ष बहुत खुश हुये और ये बात पूरे कॉलेज में फैल गई जिससे कॉलेज में अभिनव की बहुत तारीफ हुई।
     धीरे-धीरे बड़े-बड़े अध्यक्ष और अमीर लोग अभिनव से तस्वीरें बनवाने लगे और अभिनव अपनी चित्रकला से पैसे कमाने लगा।अब अभिनव अपनी चित्रकला पर और ज्यादा मेहनत करने लगा इसी बीच अभिनव की अक्षिता नाम की एक लड़की से दोस्ती हो गई।जैसे जैसे दिन बीतते गए दोनों की दोस्ती गहरी होती गई।
अभिनव अपना ध्यान चित्रकारी से हटा कर अक्षिता से बात करने पर देने लगा।इसका उसकी चित्रकारी पर बुरा असर पड़ने लगा, जहाँ वो दिन में 4 तसवीरें बनाता था वहीँ अब वो दिन में मुश्किल से सिर्फ 2 तसवीरें बना पाता था और दिन का आधे से ज्यादा समय अभिनव अक्षिता से बातें करने में निकाल देता था।दिन व दिन अभिनव से तस्वीरे बनवाने वाले कम होते जा रहे थे लेकिन इस बात का उस पर कोई प्रभाव नही पड़ रहा था क्योंकि अब अभिनव प्यार से भरे सागर में अपनी मोहबब्त की कश्ती लेकर उतर चुका था।अभिनव को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उससे उसके जीवन की पहले तस्वीर बिगड़ी।इस बात का उसे बहुत बड़ा सदमा लगा और क्यों नही लगता,वो अपने आप को एक perfect painter जो मानता था।
फिर उसने अपने जीवन को झाँक कर देखा कि वो पहले कहाँ था और अब कहाँ है।उसने अपने आप पर काबू पाया और शुरू से शुरुआत करने की सोची अब अभिनव के अंदर वो पहले वाला चित्रकार जाग चुका था।अभिनव अब अपने दिन के अधिकतर समय में paintings बनाता था और बचे हुए समय में अक्षिता से बात करता था।
अब सबकुछ पहले की तरह normal हो गया था लेकिन कहीं न कहीं अंदर ही अंदर अक्षिता को ये बात चुभने लगी थी कि अभिनव उसे कम समय देकर अपनी paintings को ज्यादा समय दे रहा है।एक दिन अक्षिता ने अभिनव से कहा कि "तुम मुझे अनदेखा कर रहे हो और जानबूझकर मुझे कम समय देकर अपनी paintings को ज्यादा समय दे रहे हो,क्या तुम मुझे फालतू समझते हो?".....अभिनव ने अक्षिता को समझते हुए कहा कि "ऐसा कुछ भी नही है जैसा तुम समझ रही हो,तुम भी मेरे लिए उतनी ही important ही जितना कि मेरा काम लेकिन मेरे लिए मेरा काम पहले है फिर कुछ और"
इस बात से अक्षिता को गुस्सा आ गया और उसने अभिनव को उसे और paintings में से किसी एक को चुनने को कहा।अभिनव ने फिर उसे समझाने की कोशिश की और कहा कि,तस्वीरें बनाना उसका काम,धर्म और जिंदगी है।लेकिन अक्षिता फिर भी नही मानी और फिर से उसने अपनी बात को दोहराया।अभिनव बात को ज्यादा आगे नही बढ़ाना चाहता था और वो अच्छी तरह से अपना बुरा भला जानता था इसलिए उसने अपने काम को चुना और वहीँ से अक्षिता और अभिनव अपने-अपने रास्ते चले गए।
धीरे-धीरे अभिनव अपनी paintings में व्यस्त हो गया और पैसों के साथ-साथ नाम भी कमाने लगा।अभिनव अपने painting वाले फैसले को चुन कर बहुत खुश था और अक्षिता को पूरी तरह से भूल चुका था,जब उसके एक दोस्त ने उससे पूछा कि "अक्षिता के जाने से तुझे कभी बुरा नही लगता" तब अभिनव वही बात कहता है जो उसने बचपन में कही थी,"कोई फर्क नही पड़ता"
और आगे कहता है कि उसके जाने से ही तो मैं इतने आगे बढ़ पाया हूँ।
आगे भी अभिनव चित्रकारी में नाम और पैसा कमाता गया और अपने सपनों को सच करता गया।
साहब का कम्बल बाँटने का ऑर्डर|Inspiring story|

इसलिये दोस्तों जिंदगी में पहले उस चीज को चुनो जो तुम्हारे लिए जरूरी है और अगर किसी वजह से तुम्हारा प्यार अधूरा रह जाय या प्यार में धोका मिले तो उस चीज को भूल कर आगे बढ़ो न कि उसी चीज के बारे में बार-बार सोच कर दुखी हो।
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