Short hindi moral story|बाहरी दिखावा|moral story for kids in hindi

बाहरी दिखावा|hindi moral story short|-


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दोस्तों इस hindi moral story के माध्यम से मैं आपको ये बताना चाहता हूँ कि आपको आपके आस पास ऐसे कई लोग मिल जाएंगे जो दूसरों को ज्ञान देते रहते हैं,बड़ी-बड़ी बातें करते रहते हैं लेकिन कभी खुद उन बातों पर अमल नहीं करते सिर्फ बाहरी दिखावा करते हैं।ये कहानी भी इसी बात पर आधारित है तो चलिए बढ़ते हैं हमारी short moral story की ओर-

इस कहानी में विवेक नाम का एक लड़का और रश्मि नाम की एक लड़की है।विवेक फेसबुक पर समाज सुधार की बड़ी बड़ी बातें करता था। आत्मसम्मान की बातें करता था और रश्मि से प्यार भी करता था और रश्मि भी उससे प्यार करती थी। दोनों अपने भविष्य के सपने देखते थे, शादी की बातें करते थे। रश्मि उसे पूरे दिल से चाहती थी, अपने हर फैसले में उसको शामिल करती लेकिन विवेक क्या करता है? कुछ नहीं बताता उसे! कहता तुम्हारे जानने लायक चीज ही नहीं है।विवेक को देश-दुनिया की तमाम जानकारी है। दोनों आपस में बहस भी करते थे सामाजिक सुधारों के ऊपर, उनको कैसे अमल में लाया जाये इसके ऊपर,रश्मि को ऐसा लगता था कि विवेक का रुझान भी उसी ओर है जिस ओर उसका रुझान है।

 एक-दो साल के रिश्ते में कभी कोई दिक्कत नहीं आई क्योंकि रश्मि बहुत ही समझदार थी वो किसी भी कीमत पर विवेक को दुखी नहीं करना चाहती थी। विवेक भी अपनी सामाजिक और प्रेममय जीवन में व्यस्त था। व्यस्तता जीवन में बहुत जरुरी होती है।विवेक महत्वकांक्षी था तो रश्मि थोड़े में ही संतुष्ट होने वाली। रश्मि को छोटी छोटी खुशियों से प्यार था। लंबी सड़क पर बारिश में भीगते हुए हाथ थाम कर चलना, साथ में खाना बनाना, विवेक के कंधे पर सर रख सो जाना लेकिन विवेक था बड़ा ही शौक़ीन। उसको ब्रांडेड कपड़े भाते थे, सेल्फ़ी लेना तो जैसे उसका पसंदीदा था, वो महलों में रहने वाला लड़का था जबकि रश्मि एक सामान्य मध्यम वर्ग परिवार से आती थी दोनों एक-दूसरे से एकदम अलग लेकिन प्यार भरपूर था। दोनों एक दूसरे को कभी कोई तकलीफ नहीं पहूंचाते थे। रश्मि को विवेक की बहुत-सी बातें अखरती थी लेकिन वो उसको जबरदस्ती कर बदलना नहीं चाहती थी। वो चाहती थी कि लड़का धीरे-धीरे समझे और खुद में स्वयं से परिवर्तन लाये।
रश्मि एक बैंक में लिपिक थी। विवेक कहता था "क्या तुम ये क्लर्क की जॉब करती हो, मेरे यहाँ आ जाओ रानी बना के रखूँगा।" इस पर रश्मि कुछ कहती नही हंस कर बात टाल जाती थी।
अब रश्मि के घर में शादी की बातें होने लगी थी। रश्मि ने विवेक को ये बात बतायी, विवेक ने अपने घर में बात की तो विवेक के घरवालो ने बहुत विरोध किया कि वो एक सामान्य मध्यम वर्ग परिवार लड़की से शादी नहीं करायेंगे लेकिन विवेक तो ज़िद पर अड़ा था, शादी करूंगा तो उसी से!
खैर विवेक के सभी को मनाने के बाद बहुत सी मान-मनोवत के बात सब राजी हुए। रश्मि के घरवाले सारी बातें करने के लिए विवेक के घर गये वहाँ की चकाचोंध देख के थोड़ा विचलित हुए पर रश्मि की ख़ुशी के लिए सब करना उचित समझा।
जब सब बातें हो गयीं तो विवेक आया और अपने पापा के कान में कुछ कहा तो फिर विवेक के पापा ने बात शुरू की कि देखिये भाई साहब हमारा विवेक अगली बार विधानसभा चुनाव लड़ना चाहता है तो उसके लिए पैसों का इंतजाम करना होगा, आप बस चालीस लाख का इंतजाम कर दें बाकी यहां होता रहेगा।
रश्मि के घर वाले ये सुनकर सन्न रह गये। उन्होंने कभी 40 लाख तो क्या 20 लाख भी एक साथ नहीं देखे थे, खैर कुछ बोले नहीं लौट आये। रश्मि ख़ुशी से उछलती-कूदती हुई जब घरवालों के पास पहूंचती है तो देखती क्या है सबके चेहरे लटके हुए हैं। उसको कुछ समझ नहीं आता है कि अब क्या गड़बड़ हो सकती है?
वो विवेक को फ़ोन लगाती है कि क्या हुआ तो विवेक कहता है "कुछ नहीं सारी बात हो गयी है, सब तय हो गया है" तो रश्मि अपने घरवालों के बारे में विवेक को बताती है कि वो लोग कुछ दुखी से हैं। लड़के को कुछ समझ नहीं आता कि ऐसा क्यों हैं?
असल में विवेक के परिवार राजनीतिक पृष्ठभूमि का रहा है तो उसे ये दहेज़, चुनाव, कट्टा ये सब आम लगता है। वो इन सब के बारे में कभी रश्मि से बात नहीं करता था।
खैर रश्मि को पता चलता है कि दहेज़ की मांग हुई है। उसे अपने कानों पर विश्वास नही होता है कि सामाजिक सुधार की बात करने वाला, समाज निर्माण में सक्रिय योगदान की बात करने वाला लड़का दहेज़ की मांग कर रहा है।
वो विवेक को मिलने बुलाती है...
"तुम दहेज़ लोगे मैंने कभी सोचा नहीं था"― रश्मि कहती है।
"अरे यार वो दहेज़ थोड़े न है बस तम्हारे पापा पैसे लगा दें तो मुझे पार्टी का टिकट मिल जायेगा। तभी न मै कुछ कर पाऊंगा इस समाज के लिए।"
"वाह क्या बात है! मैं सोचती थी कि तुम धीरे-धीरे सुधर जाओगे लेकिन नहीं तुम्हारे ऊपर तो राजनीति का भूत सर चढ़ कर बोल रहा है।"
"अरे यार क्या कह रही हो मुझको कुछ समझ नही आ रहा है?"
"अब तुमको कभी कुछ समझ नहीं आयेगा।समाज सुधार की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले,पहले उन बातों पर तुम खुद अमल करो,पहले अपने आप को परिवर्तित करो फिर किसी और को परिवर्तित करना।"
ये कह कर रश्मि वहाँ से चली जाती है और विवेक शरमिंदा होकर वहीं खड़ा रह जाता है।

इसलिये दोस्तों कभी भी बाहरी दिखावा मत करो आप अंदर से जैसे हो,बाहर से भी आपको उसी तरह होना चाहिए और दूसरों को परिवर्तित करने से पहले आपको अपने आप को परिवर्तित करना चाहिए।
दोस्तों आपको ये short hindi moral story कैसी लगी comment करके जरूर बताना और नीचे दी गई कहानियों को भी जरूर पढ़ना-

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